- विश्वप्रसिद्ध सूरजकुंड शिल्प मेले में झूला हादसा, कई लोग घायल,
- सूरजकुंड मेले में सुरक्षा पर सवाल, दो घटनाओं से मचा हड़कंप,
- मेला गेट गिरने की घटना से बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था की मांग,
- बड़े आयोजनों में सुरक्षा ऑडिट क्यों जरूरी, सूरजकुंड घटना से उठा मुद्दा,
फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला हर साल देश-विदेश के कलाकारों, कारीगरों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। 39वें संस्करण में भी भारत सहित कई देशों की हस्तशिल्प कला, लोक संस्कृति, संगीत और पारंपरिक खान-पान की झलक देखने को मिल रही है। आज इस मेले में एक झूला टूटने से 7-8 लोग घायल होने की सूचना है। आज ही एक सजावटी गेट गिरने से 1 व्यक्ति घायल हो गए।
शनिवार को दो घटनाओं से मचा हड़कंप
शनिवार को मेला दो अलग-अलग हादसों के कारण चर्चा में आ गया।
सूत्रों के अनुसार, पहले मामले में एक झूला अचानक टूट गया। मेला परिसर के मनोरंजन क्षेत्र में यह हादसा हुआ। अचानक झूला टूटने से उसमें सवार लगभग सात-आठ लोग घायल हो गए। घायलों में एक पुलिस अधिकारी भी शामिल बताया जा रहा है।
हादसे के बाद घायलों की चीख-पुकार मच गई और लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। सूत्रों का कहना है कि हादसे के वक्त झूले पर लगभग 15 वयक्ति सवार थे।
मौके पर मौजूद लोगों और मेला प्रबंधन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। अफरा-तफरी मचने से राहत कार्य में बाधा आ रही है। फ़िलहाल मनोरंजन क्षेत्र में सभी प्रकार के झूले बंद करवा दिए गए हैं।
जिला उपायुक्त और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
दूसरी घटना में सजावटी गेट नंबर दो का एक पल्ला गिरने से एक व्यक्ति घायल हो गया।
प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
अभी मेला प्रशासन कुछ भी कहने से बच रहा है और घायलों की अधिकृत पुष्टि नहीं हुई है।
इससे पहले भी 2019 झूला टूटने से एक हादसा हो चुका हो चुका है, जिसमे एक व्यक्ति के सिर में गंभीर चोटें आईं थीं।
इन घटनाओं के बाद Event Safety Management और Public Safety Protocol को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बड़े आयोजनों में सुरक्षा क्यों बनती है चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार बड़े मेलों और उत्सवों में Crowd Management, Structural Safety और Emergency Response System सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
सामान्य तौर पर ऐसे आयोजनों में राइड्स का नियमित तकनीकी निरीक्षण, गेट और संरचनाओं का लोड टेस्ट, मेडिकल और फायर टीम की तैनाती, रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम जरूरी माने जाते हैं।
सांस्कृतिक उत्सव जारी, लेकिन सुरक्षा प्राथमिकता
मेला अभी भी हजारों पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। लेकिन इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि बड़े आयोजनों में सुरक्षा प्रबंधन को लगातार अपडेट करना जरूरी है।
सूरजकुंड मेला भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों की सफलता केवल भीड़ से नहीं बल्कि सुरक्षित आयोजन से भी तय होती है।
(हादसे के अधिक विवरण की प्रतीक्षा है। )
